मौसम के हिसाब से खानपान में क्या बदलाव ध्यान में रखें?

मौसम बदलने के साथ शरीर की जरूरतें भी कुछ हद तक बदल सकती हैं। गर्मी में पसीना अधिक आने के कारण शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ की जरूरत होती है, जबकि सर्दियों में लोग अक्सर गर्म और भारी भोजन की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। बारिश के मौसम में साफ-सफाई और भोजन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। इसलिए पूरे साल एक जैसा खानपान रखने के बजाय मौसम और अपनी जरूरत के अनुसार भोजन में छोटे बदलाव करना फायदेमंद हो सकता है।

एक संतुलित डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और पर्याप्त प्रोटीन जैसे खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए। WHO भी विविध और संतुलित आहार के साथ अधिक फल-सब्जियां तथा कम नमक, फ्री शुगर और अस्वास्थ्यकर वसा लेने की सलाह देता है।

गर्मियों में खानपान में क्या बदलाव करें?

गर्मी के मौसम में शरीर से पसीने के रूप में पानी निकलता है। इसलिए पर्याप्त पानी पीना सबसे जरूरी आदतों में से एक है। पानी के अलावा खीरा, तरबूज, खरबूजा, संतरा और अन्य पानी वाले फल-सब्जियों को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

गर्मियों में बहुत ज्यादा तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन कम करना बेहतर हो सकता है। नींबू पानी या अन्य पेय लेते समय अतिरिक्त चीनी की मात्रा का ध्यान रखें। मीठे शीतल पेय की जगह सादा पानी या बिना अतिरिक्त चीनी वाले विकल्प बेहतर हो सकते हैं।

बारिश के मौसम में किन बातों का ध्यान रखें?

मानसून में भोजन की स्वच्छता और सुरक्षित पानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर खुले में रखे कटे हुए फल, लंबे समय से रखा खाना और अस्वच्छ जगहों पर तैयार भोजन से बचना बेहतर है।

इस मौसम में फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाना चाहिए। घर का ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन प्राथमिकता बनाएं। बहुत ज्यादा तला-भुना या स्ट्रीट फूड खाने की आदत को सीमित करना भी उपयोगी हो सकता है।

सर्दियों में क्या खाएं?

सर्दियों में शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्व देने के लिए संतुलित भोजन जरूरी है। इस मौसम में मौसमी सब्जियां, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, अंडे, दूध या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

सर्दियों में गाजर, पालक, मटर, सरसों का साग और अन्य उपलब्ध मौसमी सब्जियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। नट्स और बीज भी संतुलित मात्रा में लिए जा सकते हैं।

हालांकि ठंड के मौसम में घी, मक्खन या तले हुए खाद्य पदार्थों की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ाना जरूरी नहीं है। WHO अस्वास्थ्यकर वसा, अत्यधिक नमक और फ्री शुगर को सीमित रखने की सलाह देता है।

हर मौसम में इन बातों का रखें ध्यान

मौसम चाहे कोई भी हो, कुछ सामान्य खानपान की आदतें हमेशा उपयोगी रहती हैं:

  • रोजाना अलग-अलग तरह के फल और सब्जियां खाएं।
  • साबुत अनाज और दालों को भोजन का हिस्सा बनाएं।
  • पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें।
  • बहुत ज्यादा नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करें।
  • पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड कम लें।
  • भोजन को साफ-सफाई के साथ तैयार और सुरक्षित तरीके से रखें।
  • अपनी उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार भोजन की मात्रा तय करें।

WHO के अनुसार 10 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को रोजाना कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियों का लक्ष्य रखना चाहिए।

निष्कर्ष

मौसम के हिसाब से खानपान में बदलाव का मतलब अपनी डाइट को पूरी तरह बदलना नहीं है। जरूरत के अनुसार पानी, मौसमी फल-सब्जियां, प्रोटीन और साबुत अनाज की मात्रा तथा चुनाव में छोटे बदलाव करना पर्याप्त हो सकता है। गर्मियों में हाइड्रेशन, बारिश में भोजन की स्वच्छता और सर्दियों में संतुलित पौष्टिक भोजन पर विशेष ध्यान दें। सबसे जरूरी बात यह है कि हर मौसम में विविध, संतुलित और कम प्रोसेस्ड भोजन को प्राथमिकता दी जाए।

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