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गोरखपुर: फैक्ट्रियों का जहरीला पानी, आमी नदी का पानी काला – मछलियां मरीं, किसानों की फसलें बर्बाद, लोग बीमार

On: December 1, 2025 10:14 AM
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आमी नदी का पानी काला

एक समय की जीवनदायिनी आमी नदी अब “काल बन चुकी है”

गोरखपुर की आमी नदी, जो कभी किसानों की जीवनरेखा और मछुआरों की रोजी-रोटी थी, आज काले जहर में तब्दील हो चुकी है। दिसंबर 2025 की शुरुआत में नदी का पानी इतना जहरीला हो गया कि उसमें ऑक्सीजन का स्तर शून्य के करीब पहुंच गया। सहजनवा, पिपराइच, जंगल कौड़िया और खोराबार इलाके की 50 से ज्यादा फैक्ट्रियां (डिस्टलरी, चीनी मिल, पेपर मिल, केमिकल यूनिट) बिना किसी ईटीपी (Effluent Treatment Plant) के बिना सीधे गंदा पानी नदी में उड़ेल रही हैं। नतीजा – सैकड़ों मछलियां मरीं, नदी किनारे खेतों में सिंचाई करने से फसलें जलकर राख हो गईं, गांवों में त्वचा रोग और पेट की बीमारियां फैलने लगीं। लोग सड़क पर उतर आए हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन अभी तक “जांच” के नाम पर चुप है।

नदी का पानी काला क्यों हुआ? फैक्ट्रियों की लापरवाही

स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले 15 दिन से नदी का रंग धीरे-धीरे काला होता गया। अब तो उसमें से तेज केमिकल की बदबू आ रही है।

  • सहजनवा की डिस्टलरी यूनिटें दिन-रात काला गाढ़ा तरल छोड़ रही हैं
  • पिपराइच चीनी मिल का स्पेंट वॉश सीधे नदी में
  • प्लास्टिक और केमिकल फैक्ट्रियों का एसिडिक पानी बिना न्यूट्रलाइज किए
  • नदी में COD लेवल 1200 mg/L तक पहुंच गया (मानक सिर्फ 250 mg/L)
  • BOD लेवल 450 mg/L (मानक 30 mg/L) – यानी पानी में ऑक्सीजन खत्म

पर्यावरण कार्यकर्ता रवि शेखर ने बताया, “हमने 10 दिन पहले शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब हालत यह है कि नदी से 500 मीटर दूर तक बदबू फैल रही है।”

किसानों और मछुआरों का नुकसान

  • 2000+ एकड़ धान-गेहूं की फसल बर्बाद
  • आमी नदी से सिंचाई करने वाले गांवों (जंगल तुलसीराम, बेलिपार, बभनौली) में पौधे सूख गए
  • 500 से ज्यादा मछुआरे परिवार बेरोजगार – मछलियां तैरकर मर रही हैं
  • पशुओं ने नदी का पानी पीया तो बीमार पड़ गए

किसान रामदास निषाद ने रोते हुए कहा, “हमारी एक साल की मेहनत बर्बाद। नदी से सिंचाई करते थे, अब खेतों में सिर्फ काला कीचड़ बचा है।”

स्वास्थ्य विभाग ने भी चेतावनी जारी की – नदी का पानी पीने या नहाने से त्वचा और लीवर खराब हो सकता है।”

लोग सड़क पर, प्रशासन खामोश

30 नवंबर को सैकड़ों ग्रामीणों ने गोराबार पुल पर चक्का जाम किया। नारे लगे – “आमी नदी बचाओ”, “फैक्ट्रियों पर बुलडोजर चलाओ”। पुलिस ने आश्वासन देकर जाम खुलवाया, लेकिन अभी तक एक भी फैक्ट्री पर कार्रवाई नहीं हुई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है, “हम सैंपल ले रहे हैं, रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी।” लेकिन स्थानीय लोग पूछ रहे हैं – रिपोर्ट का इंतजार करें या नदी को मरने दें?

पहले भी हो चुके हैं वादे, आज तक कुछ नहीं हुआ

  • 2018 में NGT ने सभी फैक्ट्रियों को ETP लगाने का आदेश दिया था
  • 2022 में हाईकोर्ट ने 6 महीने में सफाई का निर्देश दिया
  • 2024 में जलशक्ति मंत्रालय ने आमी को पुनर्जनन योजना में शामिल किया फिर भी आज हालत और खराब है।

मांगें जो उठ रही हैं

  1. सभी 50+ फैक्ट्रियों पर तुरंत बुलडोजर या सीजिंग
  2. प्रदूषण फैलाने वालों पर NSA और गो-एक्ट
  3. प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा
  4. आमी नदी सफाई के लिए विशेष अभियान
  5. स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम और CCTV लगाना

निष्कर्ष: अगर अभी नहीं चेते तो कल बहुत देर हो जाएगी

आमी नदी सिर्फ गोरखपुर की नहीं, पूरे पूर्वांचल की जीवनरेखा है। अगर आज फैक्ट्रियों पर लगाम नहीं लगी तो कल रामगढ़ ताल भी काला हो जाएगा। यह सिर्फ पर्यावरण की नहीं, हजारों लोगों की जिंदगी का सवाल है।

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